डीएनए फिंगरप्रिंट के पिता प्रोफेसर लालजी सिंह का निधन

सेलेब्रिटी

भारत में डीएनए फिंगरप्रिंट के जनक प्रफेसर लालजी सिंह का रविवार को निधन हो गया। लालजी सिंह 70 साल के थे | उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के सदर तहसील एवं सिकरारा थाना क्षेत्र के कलवारी गांव के निवासी स्व. ठाकुर सूर्य नारायण सिंह के पुत्र थे। पांच जुलाई 1947 को डॉ. लालजी सिंह का जन्म हुआ था।

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हार्ट अटैक के बाद उन्हें बीएचयू के आईसीयू में भर्ती कराया गया लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। वह हैदराबाद के कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केन्द्र के फाउंडर भी थे।

लालजी को उनके काम के लिए जाना जाता था | बीएचयू में प्रोफेसर होने के बावजूद उनका वेतन सिर्फ 1 रुपये ही था |

उन्होंने आणविक आधार पर लिंग परिक्षण, वन्य जीव संरक्षण, फरेंसिक और मानव प्रवास पर बहुत काम किया। इसके साथ ही साथ राजीव गांधी मर्डर केस, नैना साहनी मर्डर, स्वामी श्रद्धानंद, सीएम बेअंत सिंह, मधुमिता हत्याकांड और मंटू हत्याकांड जैसे केस को डीएनए फिंगर प्रिंट तकनीक से जांच करके सुलझाया था |

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एसएसएल अस्पताल बीएचयू के सीएमएस डॉ. ओपी उपाध्याय ने बताया कि वह (लालजी) अपने जन्मस्थान जौनपुर के कलवारी गांव गए थे। वहां से वह दिल्ली जा रहे थे। वाराणसी के एलबीएस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उन्हें दिल में दर्द उठा। उन्हें बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर लाया गया, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। संभवत: लालजी को दिल का दौरा पड़ा था।

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इस दौरान बीएचयू के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद थे | बीएचयू के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया के लालजी सिंह का शव उनके गांव कलवारी ले जाया जयेगा और अंतिम संस्कार भी वही से होगा |

2011 से 2014 तक लालजी सिंह ने बीएचयू में कुलपति के पद में बने रहे | लालजी सिंह जी की शिक्षा दीक्षा बीएचयू से ही हुई है और आखरी सांस भी वह वही लिए |

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