द्रौपदी की कुछ रहस्यमय बातें जो किसी भी सीरियल में नहीं बताई गयी हैं

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महाभारत महाकाव्य दिलचस्प तथ्यों से भरा पड़ा है। इन रहस्यों के बारे में टीवी सीरियल्स में भी विस्तार से नहीं बताया गया है। इसके बारे में हम बचपन से सुनते आ रहे हैं और बहुत कुछ जानते भी हैं | लेकिन इससे जुडी कुछ बातें अभी भी लोगो के लिए रहस्य है | और इन रहस्यों के बारे में टीवी पे भी विस्तार से नहीं बताया गया है |

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द्रौपदी के बारे में कई रहस्य हैं जैसे द्रौपदी ने रोने में नहीं बल्कि निडरता से सामने करने में विश्वास रखा और अत्यंत दृढ़ विश्वास के साथ परिस्थितियों का सामना किया। द्रौपदी के बारे में बहुत सी बातें हैं जैसे उनका बचपन नहीं था, उन्हें कौमार्य वापस मिल जाता था। ऐसी ही बहुत सी बातों से कई लोग अब तक परिचित नहीं होगे। तो आइए द्रौपदी से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातें जानते हैं।

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1) काली का रूप :
द्रौपती को काली का रूप कहा गया है | जो अभिमानी कौरवों का नाश करने के लिए कृष्ण की सहायता हेतु द्रौपदी के रूप में आईं थीं।

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2) वापस हो जाती थी वर्जिन :
ऐसा कहते हैं के द्रौपती को वरदान था कि वह अपना कौमार्य वापस पा लेगी | एक पति के बाद दूसरे पति के पास जाने के लिए वह अग्नि स्नान करती थी जिससे उनकी कौमार्य वापस आ जाती थी |

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3) पांडव वंश आयी खतरे में :
भीम-हिडम्बा ( भीम की दूसरी पत्नी द्रौपदी के अलावा ) का बेटा घटोत्कच्छ जब अपने पिता के राज्य भ्रमण करने आया तब अपने माँ के कहे अनुसार द्रौपदी को सम्मान नहीं दिया | जिस वजह से द्रौपदी ने घटोत्कच्छ को कम आयु का श्राप दे दिया जिससे नाराज़ हो कर हिडम्बा ने भी पांडवो को श्राप दिया के पांडवो का वंश खत्म हो जाएगा |

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4) अनोखी शर्त :
द्रौपदी ने यह तो स्वीकार कर लिया के वह पांडवों की पत्नी बन जाएँगी | किन्तु उन्होंने यह शर्त भी रखा के वह किसी से साझा नहीं करेंगी | यही वजह थी की पांडवो की अन्य पत्नी होने के बावजूद भी द्रौपदी अकेले ही जीवन भर साथ रही |

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5) कृष्णा जी से थी दोस्ती :
कृष्णा जी हमेशा से उनके अच्छे मित्र थे | द्रौपदी जब-जब विपरीत परिस्थिति में आईं कृष्ण ने उनकी मदद की थी।

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6) दयालु स्वभाव की थी द्रौपदी :
द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने रात में द्रौपदी के पुत्रों का सिर काट डाला था। कृष्णा, अर्जुन ने अश्वत्थामा को पकड़ा औऱ द्रौपदी के पास लेकर आए और अंतिम निर्णय लेने के लिए कहा। लेकिन अपने बालकों की हत्या करने वाले अश्वत्थामा को द्रौपदी ने क्षमा कर दिया और अर्जुन से कहा कि यह गुरुपुत्र और ब्राम्हणपुत्र है, इसे मारने में हत्या का कलंक लगेगा, इसे छोड़ दें। वरना जिस तरह मुझे कष्ट हो रहा है इसकी मां को भी कष्ट होगा। इसके बाद अर्जुन ने अश्वत्थामा को छोड़ दिया।

 

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