किसी हत्यारे से कम नहीं हैं यह लोग, आप भी सहमत होंगे

पॉलिटिक्स फीचर्ड

किसी देश में गो हत्या होती हो बहुत बड़ी बात है पर कत्लखाने के समर्थन में देश के ना समझ बुद्धजीवी , राजनीतिक पार्टिया हो तो उस देश से दया, करुणा , ममता, लक्ष्मी, सभ्यता, मान्यताय सभी नष्ट हो जाती है | यही कारण हैं कि मेरे भारत देश में गाय की हत्या के नीचे मुताबिक परिणाम देश और समाज को भोगना पड़ता हैं |

1.बुद्धि का अभाव :
जव हम एक गाय को कत्ल करते हैं तो लगभग 4 हजार लीटर पानी खर्च होता हैं जिस पानी के लिये मेरे देश कि लाखो औरते, बच्चे, नौजवान पानी के श्रोत पर भिखारियों कि तरह दो – चार बर्तन के लिये घंटो तक लाईन में खड़े रहते हैं, यह कोन सी समझदारी हैं ?

2.लक्ष्मी की कमी (गरीबी ) :
क्योंकि गाय दूध देना बंद कर दे पर गोबर और मूत्र तो हमेश देती हैं जब किसी रोग में दुनिया कि सभी दवाई काम करना बंद करदे तो गोमूत्र ही रोग को सही करने की ताकत रखता हैं, खेत में गाये कि खाद भारत के मूर्खो द्वरा लाई गई विदेशी खाद से बहुत उत्तम होती हैं गोमूत्र से कीट नाशक बनाकर फसलों को बचाया जाता हैं अत: गाय आखरी सांस तक लाभदायक होती हैं |

3.यदि किसी सनकी तानाशाह ने परमाणु अटैक कर दिया तो सिर्फ गाय के गोबर से लीपी जगह पर ही मानव बचेगा बाकि सभी कि राम राम सत्य हो जाएगी यह बात देश को क्यों समझ नहीं आती हैं ?

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4.गाये किसी 1 वर्ग या धर्म या जाती कि धरोहर नही हैं पूरे देश कि है हमारी राजनेतिक पार्टियों ने अपने हितो के लिये गाय को 1 वर्ग विशेष कि आस्था से जोड़ा यही लोग आजादी के बाद आज तक पूरे देश को मूर्ख वना रहे हैं आपस में बाँट रहे हैं | इसका परिणाम पुरे देश को भोगना पड़ेगा ?

5. जब कोई किसी का क़त्ल , हत्या करता हैं तो हत्या करने बाले के अन्दर कि करुणा , ममता , दया , मानवता राष्ट्रीयता मर जाती है | कत्ल खानों से कमाया पैसा परिवार के विनाश का कारण बनता है | और इन्ही कि प्ररेणा से आतंकवादी पैदा होते हैं |

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6.कत्लखानो के मालिक, कत्ल करने वाले, उनको सहयोग करनेवाले, उनके पक्ष में खड़े होने वाले, जाने अनजाने में समर्थन करने वालो का धन राष्ट्र द्रोह के काम ही आता है | इनकी 7 पीढ़ी तक को इसका परिणाम भोगना पड़ता है | इनके परिवार के सदस्यों कि हत्या होती है वंश खत्म होते हैं पर यह मानव हैं जो बुद्धि के अभाव में इस बारे में सोच भी नही पाता | क्यों ?

7.कत्लखानो के समर्थन में कुछ राजनीतिक पार्टियां कुछ बुद्धिजीवी जिनकी बुद्धी ओवरफ्लो हो रही हैं उनका मानना है कि जो गाये दूध नही देती बूढी हो जाती हैं बीमार हो जाती हैं उन्हें कत्लखानो में हत्या के लिये भेजने में क्या दिक्कत हैं इस तर्क को तनिक आगे ले जाये यदि माँ बच्चे देना दूध देना बंद करदे बूढी हो जाये बीमार हो जाये तो क्या ? उन्हें भी कत्लखानो में भेज दे और यह कोई आम खयालो की बात नही हैं यह बुद्धिमान बूढ़े माता पिताओ को वृद्ध आश्रमो में भेज ही रहे हैं इनका बस चले तो मनुष्यों के भी कत्लखाने देश में खोल दें क्योंकि इनके अंदर कि करुणा, ममता, दया सब कुछ नष्ट हो गया है | भगवान ना करे कहीं इनके बच्चे भी ऐसे ना निकल जाए वरना ना जाने आपका क्या होगा? क्योंकि संस्कार तो आपके ही आने हैं | क्यों अपने परिवार के विनाश का कारण बन रहे हो ? इस देश के काम में लगे लोगो से विनय करना उचित नहीं हैं | फिर भी मेरा आप सभी से निवेदन है कि देश में v.i.p. मनुष्य कत्लखाने अधिक से अधिक खोलने का द्रोहों कष्ट करे या प्रयास करे जिससे आम जनता को कष्ट नहीं हो वेसे भी आप कि पूरी जिन्दगी समाज के लिये होती हैं ऐसा आप लोगो का मानना भी हैं चलिये अब अपने अंतिम समय की तैयारी में लग जाये | आपको दुनिया याद करेगी कि आपने वृद्धो के लिये कत्लखाने खोले |

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लेखक,
विष्णु खंडेलवाल

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