सिर्फ महिला ही नहीं भारत में कई जगह है पुरुष भी प्रतिबंधित

फीचर्ड विचित्र

महिलाओं को हमेशा शिकायत रहती है कि उन्हें मुख्यधारा में जोड़ा नहीं जाता अक़्सर उन पर पाबंदियां लगा दी जाती है। कुछ हद तक यह बात सच भी है। और इसके खिलाफ कई संगठन ने अपनी आवाज भी बुलंद की है।
महिलाएं आज पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। मगर आज हम आपको हैरान कर देने वाली जानकारी देने वाले हैं।

क्योंकि आज हम आपको बताने वाले हैं कुछ ऐसी जगह के बारे में जहाँ पर महिलाओं की नहीं पुरुषों की नो एंट्री है। इस पितृसत्तात्मक समाज में कुछ ऐसी जगहें ऐसी भी हैं, जहां पुरुषों का जाना या तो पूरी तरह से वर्जित है। या फिर साल में एक ख़ास वक़्त पर पुरुषों की एन्ट्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
आइये जानते हैं यह जगह कौन-कौन सी है।

जानते हैं कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में जहां पुरुषों के लिए है नो एंट्री:

इमा कैथल मदर्स मार्किट

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यह बाज़ार मणिपुर में स्थित है। हालांकि यह बाज़ार भी देश के अन्य बाज़ार की तरह ही है। यहां भी व्यापारी तेज़ आवाज में अपना सामान बेचते हैं, यहां भी उतनी ही भीड़ होती है। मगर इसके बावजूद भी यहां कुछ अलग है। वो यह कि यहां दुकान सिर्फ शादी शुदा महिलाएं लगा सकती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह बाज़ार 500 साल पुराना है। बता दें पहले ब्रिटिश सरकार और इसके बाद में पुरुषों ने कई बार इस बाज़ार को उजाड़ने की कोशिश की मगर औरतों ने एकजुट होकर हर बाहरी ख़तरे से इस बाज़ार की रक्षा की। वहीं कुछ लोग इसे एशिया का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में महिलाओं का सबसे बड़ा बाज़ार मानते हैं।

केन्या का उमोज गांव

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यह दुनिया का वो गांव है जहां सिर्फ महिलाएं ही निवास करती हैं। पुरुषों को यहां कि सीमा में भी नहीं भटकने दिया जाता। यहां ऐसी महिलाएं रहती है जिनका बलात्कार हुआ है या पुरुष प्रधान समाज की ज़्यादती का शिकार हुई है। इस गांव की स्थापना 15 महिलाओं ने मिलकर की थी यह वो महिलाएं थी जिनका ब्रिटिश सेना ने बलात्कार किया था। हालांकि यहां टूरिस्ट का खुले दिल से स्वागत किया जाता है उन्हें यह ज्वेलरी बना कर बेचती है।

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर

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यह ब्रह्मा का इकलौता मंदिर है। हिन्दू दर्शन के अनुसार ब्रह्मा द्वारा ही इस पूरी सृष्टि का निर्माण किया गया है। मगर इसके बाद भी उन्हने पूजा नहीं जाता। सिर्फ पुष्कर में ही इनका मंदिर है।14वीं शताब्दी के इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों का जाना वर्जित है।

चककुलथुकवु मंदिर, केरला 

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इस मंदिर में साल भर ही पुरुष जा सकते हैं। संक्राति पर्व के वक्त यहाँ पुरुष नहीं आ सकते, इसके अलावा नारी-पूजा के दौरान और धनुर मास में धनु-पूजा के दौरान भी इस मंदिर में पुरुष नहीं आ सकते। इस दौरान मंदिर का पूरा कामकाज नारियां ही संभालती हैं। ऐसी मान्यता है कि विशेष पूजा के समय पुरुषों का प्रवेश देवी को क्रोधित कर सकता है।

कन्या कुमारी मंदिर, तमिलनाडु

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हिन्दू धर्म के अनुसार जब सती के शरीर को विष्णु ने खंडित किया तो जहां जहां सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ बनाए गए। यह मंदिर भी एक शक्तिपीठ है यहां सती की रीढ़ की हड्डी गिरी थी। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर में भगवथी देवी का वास है और वो सन्यासी है। इसलिये इस मंदिर में कुंवारे पुरुषों का जाना प्रतिबंधित है।

अट्टुकल मंदिर, केरल

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केरल के इस मंदिर में भद्रकाली की आराधना की जाती है। यहां पोंगल का सबसे बड़ा आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में 30 लाख से भी अधिक संख्यां में महिलाएं भाग लेती है। बता दें इस आयोजन को गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिला है। अत्तुकल महोत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है और इस दौरान मंदिर में पुरुषों का प्रवेश वर्जित रहता है।

लिंग भैरवी मंदिर, तमिलनाडु

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इस मंदिर में वैसे तो पुरुष आ सकते हैं मगर कुछ ऐसी रस्में भी है जिसमें पुरुष वर्जित है। वहीं मंदिर के गर्भ-गृह में पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

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