‘आकाश हिंदू हो गया..बारिश आने दीजिए, सारी धरती मुसलमान हो जाएगी’

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जयपुर, 28 जनवरी (आईएएनएस)| समानांतर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन रविवार को वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने जीवन मूल्यों में आ रही निरंतर गिरावट, धर्म के नाम पर की जा रही राजनीति और सद्भावना के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की कोशिशों को बेनकाब करने वाली कविताओं का पाठ किया। उनकी कविता ‘रंग’ में कहा गया- ‘मजा आ गया, आकाश हिंदू हो गया अभी ठहरों बारिश आने दीजिए, सारी धरती मुसलमान हो जाएगी’।

सक्सेना ने इसी प्रकार ‘मातृ ऋण’ शीर्षक कविता में कहा- ‘हमने धरती को माता कहा और उसे कुभी पाक बना दिया। बूढ़ी होते ही गौ-माता को घर से बाहर निकाल दिया, कुछ बच्चे अपनी मां को खा जाते हैं भारत माता अपनी खैर मना।’

समानांतर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन प्रतिरोध का पंजाबी साहित्य, कविता अनंत, कहानी बुरे दिनों में और भारतीय लोकतंत्र का उत्तर सत्य विषय पर विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रोताओं की भागीदारी रही।

सक्सेना ने अपनी प्रसिद्ध कविताएं ‘बांसुरी’ और ‘शिशु’ शीर्षक की कविताएं भी सुनाई। ‘बांसुरी’ कविता में उन्होंने सुनाया-भूख मिटाने के लिए कीड़ों ने बांसों में छेद कर दिए, कीड़ो को पता ही नहीं था कि वह संगीत के क्षेत्र में एक आविष्कार कर रहे हैं। अब जब भी बजाता हूं बांसुरी तो बांसों का रोना भी सुनाई देता है। ‘गिरना’ कविता में उन्होंने जीवन में आ रहे आदर्श मूल्यों में गिरावट को इंगित किया।

प्रतिष्ठित कवि देवी प्रसाद मिश्र ने अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ किया। उनकी कविता ‘सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए’ के जरिए साहित्य संस्कृति, राजनीति, फिल्म, क्रिकेट और मनुष्य जीवन की विसंगतियों पर गहरा कटाक्ष किया। उनकी कविता में जीवन की विद्रूपताओं पर गहरा हस्तक्षेप जान पड़ता है। उन्होंने फासिस्टवाद के चेहरे और राजनीति के घिनौनेपन का चित्रण भी एक कविता ‘मुझे एक वैकल्पिक मनुष्य चाहिए’ में किया। इसी प्रकार ‘तीन जनें’ शीर्षक से सुनाई कविता में अपसंस्कृति और अमानवीयता का सजीव चित्रण किया।

इसी प्रकार साहित्य अकादमी से समादृत पंजाबी प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर और हिंदी के लोकप्रिय कवि विष्णु नागर ने भी अपनी कविताओं में समाज के आज के परिदृश्य को रेखांकित किया।

‘कहानी बुरे दिनों में’ सत्र में हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार अरुण असफल, अनिल यादव, तस्लीम खान, संतोष दीक्षित ने कहानी पाठ किया। इन समकालीन कथाकारों ने वर्तमान समय और समाज से जुड़ी कहानियों का वाचन किया एवं उन पर अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र का संचालन कथाकार उदय शंकर ने किया।

प्रतिरोध का पंजाबी साहित्य सत्र में पंजाबी के सुपरिचित रचनाकारों डॉ. तेजवंत एस. गिल, वरियाम सिंह संधु, सुखदेव सिंह, डॉ. सरबजीत सिंह और प्रो. सुरजीत जाज की सहभागिता रही। इन सभी रचनाकारों ने पंजाबी साहित्य में प्रतिरोध की स्थितियों पर प्रकाश डाला।

लेखक से मिलिए सत्र : हरीश भादानी नुक्कड़ में लेखक से मिलिए सत्र में हिंदी के जाने माने रचनाकार डॉ. जितेन्द्र भाटिया से वरिष्ठ कवि एवं व्यंग्यकार फारुक आफरीदी ने संवाद किया। भाटिया ने चीन के कथाकारों की रचनाओं के अनुवाद की चर्चा करते हुए कहा कि चीनी कथा साहित्य में लोक जीवन उभरकर सामने आता है। उन्होंने चीनी लेखक की कथा ‘आई क्यू टेस्ट’ तथा अन्य कहानियों का पाठ भी किया। संवाद में यह बात उभरकर आई कि चीन का लेखन भाषा की दृष्टि से चीनी भाषा अन्य भाषाओं की अपेक्षा भारत के निकट है।

— आईएएनएस

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