7 कारण क्यों हमें गंगा नदी के लिए चिंतित होना चाहिए !

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा को साफ करने की एक परियोजना पर काम शुरू किया था, जो की अब आलोचनाओं से घिर गया है। यहां तक ​​कि माननीय सुप्रीम कोर्ट भी असंतुष्टों का समर्थन कर रहा है क्योंकि 200 वर्षों में भी गंगा को साफ करना लगभग असंभव दिख रहा है। परियोजनाएं शुरू करना कोई नयी बात नहीं है परन्तु अब समय ठोस कदम उठाने का आ गया है इससे पहले की काफी देर हो जाए।

जल संसाधन मंत्रालय ने गंगा की सफाई को प्राथमिकता के रूप में समझा है और हम यहाँ संक्षेप में बताने जा रहे है कि हमें भी इसे प्राथमिकता के रूप में क्यों रखना चाहिए:

यह है वे 7 कारण जिसकी वजह से हमे चिंतित होना चाहिए:

1. इसकी आबादी

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भारत की 1.2 अरब आबादी का लगभग 37% जनसंख्या गंगा के चारों ओर रहती हैं। इसका मतलब यह है कि वे जल, सिंचाई, आजीविका आदि के लिए गंगा नदी पर निर्भर हैं।

2. आध्यात्मिक कारण

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बहुत से लोग आध्यात्मिक रूप से जीवित रहने के लिए गंगा की तरफ जाते हैं, इसलिए हमें पता होना चाहिए कि पानी सचमुच नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से ‘पवित्र’ है। हिंदू गंगा में एक डुबकी लेते हैं और इसे एक ईश्वर के रूप में पूजा करते हैं क्योंकि उनका मानना ​​है कि इसका पानी शुद्ध है और आपको अपने पापों से मुक्ति दिलाता है।

3. यह एक सीवर बन गयी है

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जब सूरज भोर में उठने वाला होता है, गंगा अपनी सुंदरता को उजागर करती है। लेकिन जैसे ही गोधूलि बेला आती है, नदी प्रदूषित पक्ष का अनावरण होता है।

4. गंगा न केवल गंदी है लेकिन अब विषाक्त है

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नदी गंगा अब ना केवल गंदी बल्कि विषैली भी हो गयी है। गंगा का पानी बहुत सी जानलेवा बीमारियों का घर हो चूका है।

5. यह पीने के लिए असुरक्षित है

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गंगा के पानी में फेकल कॉलफॉर्म 50 प्रति 100 मिलीलीटर पानी और 500 प्रति 100 मिलीलीटर से अधिक हो गई है, जिससे इसका पानी पीने के लिए असुरक्षित है।

6. यह कृषि के लिए असुरक्षित हो गयी हैं

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भारत की कृषि का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी पर निर्भर करता है और वाराणसी के चारों ओर फेकल कॉलिफोर्म की संख्या 1 -2 मिलियन पर मिलीलीटर पानी है जो कि कृषि के लिए उपयुक्त नहीं है बल्कि फसलों को नुकसान पहुंचाती है।

7. गंगा का संपूर्ण ऊपरी भाग प्रदूषित हैं

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कई महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाएं गंगा के ऊपरी बेसिन में चल रहीं है। 16 नए बांध भी बनाये जा रहे है। वाराणसी और हुगली के बीच 1,600 किलोमीटर की दूरी पाइप लाइन में है इसलिए गंगा को साफ करने की तत्काल आवश्यकता है।

कई सरकारों ने गंगा नदी को साफ करने के कई प्रयास किए हैं, जैसे कि 1985 में, तब तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने $ 226 मिलियन गंगा कार्य योजना की स्थापना की, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने भी एनजीआरबीए द्वारा मास्टरमाइंड प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था।

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