शादी के बाद भी अगर नहीं है शारीरिक संबंध तो ले सकते हैं तलाक यह है कानून

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भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, लोकतंत्र का अर्थ है जनता का राज। जनता को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो इसके लिए हमारी सरकार ने जनता को कुछ मौलिक अधिकार दिए हैं। और वो अधिकार औरत और पुरुष दोनों के लिए है। ऐसे ही कुछ अधिकारों की हम बात करने वाले हैं जो शादी शुदा व्यक्तियों के लिए काफी काम के साबित हो सकते हैं। जैसे शादी के बाद भी यदि आपका पति या पत्नी 1 साल तक अपने पार्टनर से आपस में फिजिकल रिलेशन नहीं बनाता तो इसके आधार पर तलाक के लिए अर्जी डाली जा सकती है। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को स्वीकार किया है। वहीं पत्नी को यह भी अधिकार प्राप्त है कि यदि उसका पति बेवजह उसे 2 साल तक छोड़ कर चला गया है, तो पत्नी को पूरा अधिकार है कि वह तलाक ले सके। वहीं पति से तलाक के बाद यदि पत्नी दूसरी शादी नहीं करती, तो उसे पूर्व पति से मेंटेनेंस पाने का पूरा अधिकार होता है। ऐसे 6 कानूनी अधिकारों की आज हम बात करने वाले हैं।

होती है मानसिक क्रूरता 

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अगर शादी के बाद भी कोई अपने पार्टनर से शारीरिक संबंध नहीं स्थापित करता है तो इसे मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखा जाता है। इसे तलाक के लिए एक योग्य वजह के रूप में प्रस्तावित किया जा सकता है।

पति की मर्जी के बिना धर्म नहीं बदलना

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यदि कोई पति अपनी पत्नी की मर्जी के बिना यदि अपना धर्म बदल लेता है, तो ऐसी परिस्थिति में भी पत्नी को तलाक लेने का अधिकार भी कानून देता है। ऐसे ही यदि पति अपनी पत्नी को शारीरिक या मानिसक रूप से प्रताड़ित करता है तो ऐसे रिश्ते से भी क़ानूनी रूप से छुटकारा पा सकती है।

पब्लिक प्लेस में प्यार कम दिखाएँ

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भारत में प्यार को भोग की वस्तु नहीं माना गया है इसीलिए हमारे देश में पब्लिक प्लेस में पब्लिक प्लेस पर अश्लील हरकत करना गैरकानूनी है। इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 294  के तहत इसे जुर्म की श्रेणी में रखा गया है।

MRP रेट पर भी मोलभाव किया जा सकता है

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एमआरपी का अर्थ होता है मैक्सिमम रिटेल प्राइस अर्थात दुकानदार इस रेट से ज़्यादा कीमत में चीजें नहीं बेच सकता। हालांकि ग्राहक इस रेट पर भी मोलभाव कर सकता है यह उसका कानून हक़ है।

3 साल के भीतर हो सकती है कार्यवाही

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यदि कोई आपसे करार कर के अपनी बात से पलट गया है तो आप उसके खिलाफ भी कार्यवाही कर सकते हैं। भारतीय कानून में तीन साल के भीतर उस पर शिकायत करने का प्रावधान है।

टैक्स चोरी की तो जेल हो सकती है

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1961 की इनकम टैक्स ऐक्ट के अनुसार टैक्स चोरी या टैक्स उलंघन के मामले में टैक्स रिकवरी ऑफिसर आरोपी को गिरफ्तार कर सकता है।

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