जानिये बचपन से जुडी ऐसी छोटी-छोटी आदतों के बारे में जो ज़िन्दगी को तनावमुक्त बनाने में मदद कर सकती हैं

फीचर्ड लाइफस्टाइल

बचपन की रोक टोक, और सबके सताए जाने पर हम सब ने बचपन में भगवान के सामने हाथ जोड़ कर भोले मन से कहा है “भगवान मुझे जल्दी से बड़ा कर देना। हमेशा से एक सपना हम देखते हैं कि हम जल्दी से बढे हो जाए, कमाने लग जाएं और अपने फैसले खुद लेने लग जाएं। मगर जैसे-जैसे हम बड़े होने लगते हैं आखों के सामने एक ऐसी विचित्र फिल्म चलने लग जाती है जिसके बारे में हमने सोचा भी नहीं था। क्योंकि इसके बाद सिवाय टेंशन के कुछ नहीं मिलता कॉलेज के बाद नौकरी की टेंशन, फिर बॉस की टेंशन और फिर कुछ दिन बाद बेहतर कंपनी और सैलरी की टेंशन। इसके साथ-साथ उम्र बढ़ती जाती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ तनाव भी बढ़ता जाता है। हालाँकि हम उम्र के बढ़ते क्रम को तो नहीं रोक सकते, लेकिन बचपने की कुछ आदतों के साथ बढ़ते तनाव पर नियंत्रण ज़रूर कस सकते हैं।

छोटी चीजों में खुशियाँ खोजने की कोशिश करें

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जिस तरह बचपन में हम छोटी-छोटी खुशियाँ पा कर जैसे खिलौने, कार्टून या गुब्बारे पा कर खुश हो जाया करते थे। ऐसी ही ख़ुशी हम आज भी छोटी-छोटी चीजों में खोज सकते हैं। यह ख़ुशी किसी से भी हासिल की जा सकती है जैसे मां की बनाई किसी स्पेशल डिश में हो सकती है या आॅफ़िस के बाद पेंटिंग करने में, या कुछ वो भी जो आपको पसंद हो।

जल्दी सोएं और नींद पूरी लें

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अनुमन चिड़चिड़ेपन का कारण नींद पूरी तरह नहीं लेना होता है या नींद का ठीक से नहीं होना है। आप जब छोटे थे तो आपके परिजन आपकी नींद को ले कर काफी चिंतित रहते होंगे। हर चीज़ के लिए एक समय निर्धारित था, इसी कारण उस वक्त हमे ज्यादा तनाव नहीं रहता था। अब भी हम अगर सोने का वक़्त निश्चित कर लें और आठ घंटे की पूरी नींद लें तो जीवन में तनाव कम हो सकता है।

माँ के हाथ का खाना

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माँ का खाना की जड़ी बूटी से कम नहीं होता अब के मुकाबले हम बचपन में इसलिए भी ज़्यादा स्वस्थ्य रहते थे। अभी भी अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो बाहर का खाना कम खाएं।

चाय कॉफ़ी की तुलना में दूध या ज्यूस ले

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बचपन में जो जगह ज्यूस और दूध को दी गयी थी वो जगह आज चाय और कॉफ़ी ने ले ली है। अगर आप आज भी दूध और ज्यूस का सेवन करना शुरू कर देते हैं तो आपका जीवन कहीं ज़्यादा स्वस्थ्य हो सकता है आपका।

गुस्से को दिल में न रखें

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जिस तरह बचपन में हम फट से रूठ जाते थे और फट से मान जाते थे। नहीं नहीं मैं वैसा बचपना फिर से करने की नहीं कह रहा बस वो बातें भुला देने वाली आदत खुद में शुमार कर लीजिए तो जीवन से तनाव कम हो जाएगा

ज़्यादा से ज़्यादा सवाल पूछें

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हम जैसे जैसे बड़े हो जाते हैं सवाल पूछने पर झिझकने लगते हैं। शायद हमारे मन में यह डर रहता है कि कहीं हमारी बेइज़्ज़ती तो नहीं हो जाएगी। सवाल पूछना कम न करिए, इससे कई हल निकल आते हैं और मानसिक तनाव कम होता है।

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