जब अजनबियों के साथ सेक्स करना भी थी एक प्रथा, प्राचीन काल से जुड़े सेक्स के कुछ रोचक तथ्य

फीचर्ड लाइफस्टाइल

मैं यह नहीं कहूँगा की भारत ही सिर्फ पिछड़ा है, या खुले विचारों वाला नहीं है। हालांकि आज भी हमारे देश में सेक्स शब्द को जुबान पर नहीं लाया जाता या यूँ कहूँ इसे भी एक तरह से गाली समझी जाती है। वैसे देखा जाए तो आज से ही नहीं और न ही सिर्फ अपने देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए सेक्स एक उलझन भरा विषय रहा है, जो भी इसे सुलझाने जाता वो इसी में उलझ कर रह जाता। आज दुनिया चाहे मंगल पर पहुँच गयी हो मगर सेक्स को ले कर सभी की धारणा वैसी ही हिया इसी कारण आज भी इसे दुनिया के कई हिस्सों में टैबू की तरह देखा जाता है। वहीं सेक्स को ले कर प्राचीन समय की कुछ किस्से काफी मशहूर है, इन्हें सुनने के बाद आप समझ जाएंगे के पहले लोग सेक्स को लेकर किस हद तक दीवाने थे।

उधार दे दी जाती थी बीवी

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प्राचीन प्री-इस्लामिक अरब में एक अलग प्रकार की प्रथा प्रचलन में थी, जिन्हें अपने बच्चे के जिनेटिक गुणों में विकास करना होता था उन परिवारों में इस रिवाज का खासा असर था। हालाँकि कोई भी पत्नी अपनी पत्नी हर किसी के पास नहीं भेज देता था, इसके लिए पति शहर के मशहूर और आकर्षक लोगों का चुनाब करता था। ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि बच्चे में उनके गुण आ जाए। खास बात ये है कि उस दौर में भी समाज किसी भी तरह से बेज्जती से बचता था यानि इस तरीके से पैदा हुए बच्चों के सामाजिक पिता को ही असल में बच्चे का पिता माना जाता था न कि बच्चे के बायोलॉजिकल पिता को।

26000 हज़ार पुराने सेक्स टॉयज़

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कहा जाता है दुनिया का सबसे पुराना सेक्स टॉय पत्थर का डिल्डो था। इसे लगभग26000 हज़ार साल पुराना माना जाता है। वहीं अगर मिस्त्र से आई रिपोर्ट की मानी जाए तो क्लियोपैट्रा नामक महिला का नाम सामने आता है, जिसने पहली बार वाइब्रेटर का इस्तेमाल करना प्रारंभ किया था। वे इस दुनिया में इसलिए भी काफी अलग थी क्योंकि उन्हें उस दौर में अपने सेक्स टॉय के साथ काफी प्रयोग के लिए जाना जाता था।

मॉर्डन दौर की समलैंगिकता प्राचीन दौर से काफी अलग है

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प्राचीन ग्रीक और रोमन्स इस अवधारणा पर विश्वास नहीं करते थे, उनके अनुसार समलैंगिकता जैसी कोई चीज़ नहीं होती। शायद यही वजह है कि होमोसेक्शुएल के लिए कोई लैटिन या ग्रीक शब्द बना ही नहीं था। उस दौरान इसे तुच्छ नज़रो से नहीं देखा जाता था मगर मर्दानगी दिखाने वाले पुरुषों को उस समाज में काफी वाह वाही मिलती थी।

बच्चों की सेक्शुएल ज़रूरतों के लिए माता-पिता थे ज़िम्मेदार

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माया सभ्यता में बेटों की परवरिश में बेहद ध्यान दिया जाता था। न सिर्फ आर्थिक और भावत्मक जरूरतों के लिए बल्कि सेक्शुएल जरुँरतो के लिए भी माता-पिता ज़िम्मेदार थे। मगर यह अपने बेटे के लिए कोई महिला पार्टनर को नहीं ढूंढते बल्कि पुरुष साथी चुनते थे। इस तरह के मिलन को उस वक्त के आदिवासी सामाज ने मान्यता दे रखी थी।

अजनबियों के सेक्स की प्रथा

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हीरोदौट्स नाम के एक लेखा हुई जिन्होंने अस्स्य्रिंस के अनूठे जिस्मफरोशी रिवाजों को उजागर किया। मगर इसके तथ्य नहीं दे पाए। उन्होंने अपनी किताब में लिखा कैसे कुंवारी लड़की को अनजाने के साथ शारीरिक सबंध बनाने पड़ते थे। इस रिवाज में समाज के ऊँचे तबके से ले कर छोटे तबके तक सब तरह की लड़कियां शामिल होती थी। जो भी महिला इस प्रतियोगिता में शामिल होती थी उसे दूसरों से अलग दिखने के लिए एक खास तरह का क्राउन पहनाया जाता था। सबसे पहले जो शख़्स यहां मौजूद किसी महिला को चुन लेता उसके बाद दोनों के बीच रिवाज़ के मुताबिक सेक्स होता था , इस प्रक्रिया के खत्म होने के बाद कोई भी महिला को जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने के लिए बाधित नहीं कर सकता था।

जानवरों के साथ शारीरिक सबंध

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जानवरों के साथ शारीरिक सबंध को हमेशा एक अपराध के रूप में ही देखा जाता था। इसकी शुरुआत 7 वि शताब्दी में इटली में बनी एक पेंटिंग से मानी जाती है। वहीं प्राचीन रोम में इसे एक कला के रूप में लिया गया है। रोमन महिलाएं सांपों को अपने पास सेक्शुएल कारणों से रखती थीं। वहीं प्राचीन मिस्त्र में हिरण के साथ महिलाओं का संबंध बनाना एक सामान्य बात मानी जाती थी।

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