कभी सोचा है झूठ क्यों बोलते हैं लोग? हम बताते हैं इसके 6 बड़े कारण

फीचर्ड लाइफस्टाइल

अगर कोई किसी रिश्ते को ख़त्म कर सकता है तो वो झूठ है। यह आसानी से सालों पुराने रिश्ते को पल भर में तबाह कर सकता है। आलम यह है कि झूठ कोई सुनना पसंद नहीं करता। मगर फिर क्यों लोग झूठ पर झूठ झूठ पर झूठ बोला करते हैं। हर किसी से सुनने को बस यही मिलता है कि मन में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। मगर बावजूद इसके कई लोग है जो बस झूठ के सहारे अपने जीवन का गुज़र बसर कर रहे हैं। कुछ लोग तो इतने बड़े वाले होते हैं कि असलियत पता होने के बाद भी मुंह पर झूठ बोलने से भी नहीं कतराते। वहीं कुछ झूठ को कई लोग इसलिए भी सच से बड़ा मानते हैं क्योंकि वो किसी को बचाने के लिए बोला गया। मगर अंत में झूठ बस झूठ होता है आइये जानते हैं आखिर वो कौनसी वजह होती है जिसके कारण इंसान झूठ बोलता है।

झूठ ही सब कुछ होता है

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कुछ बातें ऐसी होती है जो अनुमन सामान्य होती है। मगर वही बातें झूठ बोलने वाले के लिए काफी बड़ी होती है। जिन बातों पर चिंता करने की जरुरत नहीं उन पर वे अधिक अधिक से दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। इसका कारण यह है कि उनकी नज़र में वो मुद्दा काफी बड़ा और संवेदनशील होता है। वे अपनी ही बनाई चीजों में इतना घुल जाते हैं कि उन्हें जब तक कोई अच्छे से नहीं समझाता उनके समझ में नहीं आता। उनसे पूछा जाना चाहिए ‘क्या वास्तव में ये मामला तुम्हारे लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है और आखिर क्यों?’

हालातों पर काबू पाना

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 कई बार ऐसा भी होता है हम झूठ बोल कर हालातों से समझोता करने की कोशिश करते हैं। मगर यदि सच पूछा जाए तो उसमें आपकी हार ही छुपी होती है। आपको लगता है झूठ बोल कर आप हालत पर काबू पा लेंगे मगर होता हमेशा इससे विपरीत है।

किसी को निराश नहीं करने की चाहत

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कई बार हमारे जीवन में इतने प्यारे लोग होते हैं कि हम सच बोल कर उनका दिल नहीं दुखाना चाहते हैं। इसलिए हम अक्सर झूठ बोलकर उन्हें ख़ुशी देने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही एक यह भी डर सीने में छुपा होता है कि कहीं सच बोलने से वो आपको खो न दे। वहीं कई बार लोग दूसरों को छोटा और खुद को बड़ा साबित करने के लिए भी झूठ का सहारा लेते हैं।

झूठा होने पर भी झूठा साबित नहीं होना

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कहा जाता है एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं। मगर झूठ का पुल बनाने से पहले यह बात सोच लेनी चाहिए कि यह पूल जा गिरेगा तब आपका क्या होगा ? आपको अपने झूठ को बचाने के लिए और झूठ इसलिए भी बोलने पड़ते हैं क्योंकि अगर आपके झूठ के बारे में सामने वाले को पता चल गया तो वो आगे से कभी आप पर विश्वास नहीं करेगा।

झूठ को झूठ नहीं मानते

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लोगों का दिमाग कुदरत का दिया एक अनूठा वरदान है। एक ऐसा वरदान जिसे बनाने के बाद खुद कुदरत भी उसके बारे में न समझ पाए। कई बार इस दिमाग की सहायता से लोग अपनी अलग ही दुनिया बना लेते हैं और जब वे झूठ बोलते हैं, तब वो झूठ उनकी नज़र में झूठ नहीं होता है।

झूठ को सच में बदलने की ख्वाहिश

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झूठ बोलने वाले व्यक्ति की एक परेशानी होती है। वो सोचता है कि अगर वो एक झूठ को बार-बार दोहराएगा तो वो झूठ सच में बदल जाएगा। मगर यह संभव नहीं है एक झूठ बस एक झूठ ही होता है, जो कभी इससे कम और इससे ज़्यादा नहीं होता। इसलिए हमेशा झूठ बोलने से जितना हो सके उतना बचना चाहिए।

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